जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026

 अष्टमी तिथि शुरू- 02.26 (4 सितंबर) से मध्य रात्रि 12.14 (5 सितंबर) तक 
रोहिणी नक्षत्र आरंभ- 00.29 से 23.03 तक ( 4 सितंबर )
व्रत पारणा- 06.21 के बाद ( 5 सितंबर )
श्रीकृष्ण की जन्म पूजा के लिए मध्यरात्रि का समय सबसे महत्वपूर्ण रहेगा। पूजा का शुभ समय 4 सितंबर को रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक रहेगा।
ऐसे में अबकी बार जन्माष्टमी 4 सितंबर यानी शुक्रवार को रोहिणी नक्षत्र अष्टमी तिथि के संयोग में मनाई जाएगी। वहीं, कृष्णजी की छठी बुधवार को मनाई जाएगी। ऐसे में अबकी बार जयंती योग का दुर्लभ संयोग बना है। पुराणों में जयंती योग में जन्माष्टमी का मिलना पूर्व जन्मों का फल माना जाता है क्योंकि इस दुर्लभ संयोग में जन्माष्टमी व्रत को करने से महान पुण्य की प्राप्ति होती है। निर्णय सिंधु में बताया गया है कि यानी रोहिणी युक्ता जन्माष्टमी में कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत करने से तीन जनों के पापों का शमन हो जाता है। इस बार भगवान श्रीकृष्ण का 5253वां जन्मोत्सव मनाया जाएगा। जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई जाएगी, वहीं वैष्णव संप्रदाय से जुड़े लोग 5 सितंबर को जन्माष्टमी का पर्व मनाएंगे। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव में निशीथ काल का विशेष महत्व माना जाता है. इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण की पूजा, आरती, झूला झुलाने और उनका विशेष श्रृंगार करने की परंपरा है। ( निशीथ काल समय- 00.11 से 00.56 तक हैं। )
जन्माष्टमी के दिन भक्त व्रत रखते हैं और फलाहार करते हैं. इसके अलावा, दही-हांडी का उत्सव 5 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा.भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का कृष्ण भक्तों के लिए विशेष महत्व होता है. इस दिन भगवान को फल, माखन-मिश्री और पंचामृत का भोग लगाया जा सकता है. घर के मंदिर को फूलों और अन्य सजावटी चीजों से सजाया जाता है. भगवान श्रीकृष्ण को नए वस्त्र पहनाकर उनका सुंदर श्रृंगार किया जाता है। जिन लोगों के घर में लड्डू गोपाल विराजमान हैं, वे उनके मुकुट, बांसुरी, वस्त्र और आभूषणों से विशेष श्रृंगार कर सकते हैं वहीं अगर आपके घर में लड्डू गोपाल नहीं हैं तो आप किसी श्रीकृष्ण मंदिर में जाकर भगवान को बांसुरी, मोरपंख, फल या अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर सकते हैं. तुलसी दल, माखन-मिश्री और अन्य सात्विक भोग भी भगवान श्रीकृष्ण को प्रिय माने जाते हैं। इस वर्ष जन्माष्टमी पर योग की बात करें तो हर्षण योग सुबह से दोपहर 3 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। इसके बाद वज्र योग आरंभ होगा, जो 5 सितंबर को दोपहर 12 बजकर 47 मिनट तक बना रहेगा। इस तरह जन्माष्टमी की मध्यरात्रि पूजा के समय मृगशिरा नक्षत्र और वज्र योग का संयोग रहेगा।