हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को सुबह 9:10 बजे शुरू होगी और 28 अगस्त को सुबह 9:49 बजे समाप्त होगी. उदया तिथि के आधार पर 28 अगस्त को रक्षाबंधन हैं। रक्षाबंधन का दिन इस बार बहुत खास है। इस दिन ग्रह और नक्षत्रों को मिलाकर 7 शुभ योग मिल रहे हैं। सबसे पहले शतभिषा नक्षत्र है, इसके खास तौर पर भगवान शिव की पूजा के लिए खास कहा जा रहा है। इसका स्वामी राहु है, इस दिन भगवान शिव की पूजा का खास फल मिलता है। इस नक्षत्र का संबंध वरुण देव से माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस नक्षत्र में किए गए दान, पूजा और आध्यात्मिक कार्यों का विशेष महत्व होता है।
इसके अलावा इस दिन भद्रा भी नहीं है, ऐसे में रक्षा बंधन के दिनभर मना सकेंगे। इस बार रक्षा बंधन पर खास बात यह है कि इस बार भाई की कलाई में रक्षा सूत्र बांधने के लिए बहनों को भद्रा का झंझट नहीं है। मान्यताओं के अनुसार रक्षाबंधन की शुरुआत इस कथा से हुई। द्रोपदी ने भगवान कृष्ण के हाथ पर चोट लगने के बाद अपनी साडी से कुछ कपडा फाडकर बांधा था, द्रोपदी की इस करुणामय उदारता के लिए श्री कृष्ण ने उन्हें वचन दिया था कि वे द्रोपदी की हमेशा रक्षा करेंगे। इसीलिए दुःशासन द्वारा चीरहरण की कोशिश के समय भगवान कृष्ण ने आकर द्रोपदी की रक्षा की थी।
रक्षा-सूत्र या राखी बांधते हुए निम्न मंत्र पढा जाता है।
येन बध्दो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:।
तेन त्वाम प्रतिबद्धनामि रक्षे माचल माचल।।