शनि जयंती अमावस्या 16 मई

 हिन्दू धर्म में दान-पुण्य और पितरों की शांति के लिए किये जाने वाले पिंड दान व तर्पण के लिए अमावस्या को शुभ माना गया है। वहीं ज्येष्ठ अमावस्या पर शनि जयंती भी मनाई जाती है, अतः इस कारण से ज्येष्ठ अमावस्या का महत्व और भी बढ जाता है। इस दिन शनि देव के पूजन का विशेष विधान है। सूर्य पुत्र शनि देव हिन्दू ज्योतिष में नवग्रहों में से एक हैं। मंदगति से चलने की वजह से इन्हीं शनैश्चर भी कहा जाता है। शनि जयंती के साथ-साथ उत्तर भारत में महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिये इस दिन वट सावित्री व्रत भी रखती हैं। हिंदू धर्म में अमावस्या को पितरों का तर्पण और स्मृति के लिए काफी खास माना जाता है। इस दिन पितरों को जल और तिल आदि अर्पित करते हैं, जिससे वह अपने वंश को सुख-समृद्धि और सौभाग्य का आशीर्वाद देते हैं। इस दिन पितरों का तर्पण करने से पितरों तक जल्द आपका तर्पण पहुंचता है। इसके साथ ही अगर आपकी कुंडली में पितृदोष है, तो नियमित रूप से तर्पण और श्राद्ध करने से उसके दुष्प्रभाव कम हो सकते हैं। धर्मग्रंथों के अनुसार तर्पण से पितरों को तृप्ति मिलती है, जिससे व्यक्ति को मानसिक, शारीरिक शांति मिलने के साथ पुण्य की प्राप्ति हो सकती है। इन सभी अमावस्या में सर्वपितृ अमावस्या सबसे खास मानी जाती है, जो श्राद्ध पक्ष के दौरान पड़ती है। पौराणिक मान्यताओं के अनसार ज्येष्ठ अमावस्या पर शनि देव का जन्म हआ था, इसलिए ज्येष्ठ अमावस्या का धार्मिक महत्व और भी बढ जाता है। वैदिक ज्योतिष में शनि देव सेवा और कर्म के कारक हैं, अत: इस दिन उनकी कृपा पाने के लिए विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। शनि देव न्याय के देवता हैं उन्हें दण्डाधिकारी और कलियुग का न्यायाधीश कहा गया है। शनि शत्रु नहीं बल्कि संसार के सभी जीवों को उनके कर्मों का फल प्रदान करते हैं। 
■ इच्छा पूर्ति शाबर मंत्र: इच्छा पूरी करने के लिए 108 बार इस मंत्र का जाप करना लाभकारी हो सकता है- ‘ॐ नमो परब्रहम परमात्मने नमः…’
■ लक्ष्मी प्राप्ति मंत्र: आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए 1108 बार इस मंत्र का जाप करें- ‘ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं सिध्द लक्ष्म्यै नमः’
■ गायत्री मंत्र: आध्यात्मिक उन्नति के लिए गायत्री मंत्र का जाप करना लाभकारी हो सकता है।
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यंभर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्