चतुर्दशी-15फरवरी को 17:04 बजे से 16 फरवरी को 17:33 बजे तक
निशीथ काल मुहूर्त : 00.24 से 01.13 तक ( 16 फरवरी )
महाशिवरात्री पारणा मुहूर्त 07.05 से 1 5.24 तक (16 फरवरी को )शिवरात्रि को लेकर बहुत सारी कथाएँ प्रचलित हैं। विवरण मिलता है कि भगवती पार्वती ने शिव को पति के रूप में पाने के लिए घनघोर तपस्या की थी और फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था यही कारण है कि महाशिवरात्रि को अत्यन्त महत्वपूर्ण और पवित्र माना जाता है। शिवरात्रि के दिन शिव पुराण का पाठ और महामृत्युजय मंत्र या शिव के पंचाक्षर मंत्र "ॐ नमः शिवाय" का जाप इस दिन करना चाहिए साथ ही महाशिवरात्री के दिन रात्रि जागरण का भी विधान है। शास्त्रीय विधि-विधान के अनुसार शिवरात्रि का पूजन 'निशीथ काल' में करना सर्वश्रेष्ठ रहता है। हालॉकि भक्त रात्रि के चारों प्रहरों में से अपनी सूविधानुसार यह पूजन कर सकते हैं।
महाशिवरात्रि पर सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें, दिनभर फलाहार या उपवास रखें रात में शिवलिंग पर गंगाजल, दूध और शहद से अभिषेक करें और ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें। विवाहित महिलाएं माता पार्वती को सुहाग सामग्री अर्पित कर सुखी दांपत्य की कामना कर सकती हैं।महाशिवरात्रि पर रातभर जागकर चार प्रहर में पूजा करने की परंपरा है।
■ पहला प्रहर- (शाम 18.11 से रात 21.23 मिनट तक) 15 फरवरी
दूसरा प्रहर- (रात 21.23 से लेकर रात 00.35 मिनट तक) 16 फरवरी
तीसरा प्रहर- (रात 00.35 मिनट से तड़के 03.47 मिनट तक
चौथा प्रहर- (03.47 मिनट मिनट से – सुबह 06.59 मिनट तक।
प्रदोष काल पूजा –15 फरवरी को 18:00 बजे से 20:38 बजे के बीच।
महाशिवरात्रि के दिन सुबह 08:24 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक
जलाभिषेक का सबसे उत्तम मुहूर्त रहने वाला है। (15 फरवरी )
- शिव गायत्री मंत्र (बुद्धि व ध्यान के लिए ) -
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि । तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् ॥