यह दिन देवी सरस्वती मां को समर्पित है, जो बुद्धि और वाणी की अधिष्ठात्री देवी हैं। इस दिन उनकी पूजा से एकाग्रता और सफलता मिलती है। खासकर छात्रों के लिए यह दिन शुभ होता है।
ऋतु परिवर्तन: यह वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है, जब प्रकृति में हर तरफ हरियाली और फूल खिलते हैं। इस दिन कामदेव और रति की पूजा भी होती है, और दक्षिण भारत में इसे 'श्री पंचमी' के रूप में मनाते हैं, जो देवी लक्ष्मी से जुड़ा है। वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती का शृंगार पिताम्बरी परिधान में किया जाता है, जो इस त्यौहार तथा इस नदी से उनके गहरे रिश्ते का परिचायक है और उसे पूर्णता प्रदान करता है। इस दिन लोग भी पीले वस्त्र धारण करते हैं और पीले रंग के ही व्यंजन बनाते, खाते तथा एक दूसरे से साझा करते हैं। इसके साथ ही, कुछ मान्यताओं तथा परंपराओं में बच्चों की औपचारिक शिक्षा भी वसंत पंचमी से आरंभ की जाती है क्योंकि वसंत पंचमी का दिन देवी सरस्वती की आराधना का दिन है।आज के दिन धन की देवी 'लक्ष्मी' (जिन्हें श्री भी कहा गया है) और भगवान विष्ण् की भी पूजा की जाती है। कुछ लोग देवी लक्ष्मी और देवी सरस्वती की पूजा एक साथ ही करते हैं। सामान्यत: क़ारोबारी या व्यवसायी वर्ग के लोग देवी लक्ष्मी की पूजा करते हैं। लक्ष्मी जी की पूजा के साथ "श्री सूक्त" का पाठ करना अत्यत लाभकारी माना गया है।
मंत्र- "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वत्यै नमः"