मकर संक्रांति 14 जनवरी 2026

 सूर्यदेव का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी दोपहर 15.07 को होगा ।
मकर संक्रांति को दान-पुण्य का समय दोपहर 15.07 से शाम 18.02 तक होगा हिंदू शास्त्रानुसार 14 जनवरी को  भगवान सूर्य धनु राशि से निकलकर अपने पुत्र शनिदेव की राशि मकर में प्रवेश करते हैं. इस दिन स्नान, ध्यान और दान करने का बहुत ज्यादा महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन व्यक्ति सूर्य रश्मियों के पुण्य प्रभाव से पूरे साल सुख, सौभाग्य और आरोग्य को प्राप्त करता है। मत्स्य पराण और स्कंद पुराण में उत्तरायण के महत्व का विशेष उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि आध्यात्मिक प्रगति और ईश्वर की पूजा-अर्चना के लिए उत्तरायण काल विशेष फलदायी होता है।उत्तरायण काल में गृह प्रवेश, दीक्षा ग्रहण, विवाह और यज्ञापवेत संस्कार आदि शुभ माना जाता है। महाभारत के अनुसार, भीष्म पितामह ने उत्तरायण काल की प्रतीक्षा करते हुए अपने प्राण त्यागे थे। मान्यता है कि उत्तरायण में देह त्याग करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी कारण पूरे उत्तरायण काल को अत्यंत पुण्यदायी एवं विशेष माना गया है।
■ मकर संक्रांति के दिन प्रातः काल स्नान कर  खुले स्थान, घर की छत या आंगन में पूर्व दिशा की ओर मुख कर सूर्यदेव का ध्यान करते हुए पूजा की जाती है। तांबे के पात्र में स्वच्छ जल, लाल फूल, अक्षत और गुड़ डालकर सूर्य को अर्घ्य अर्पित करना शास्त्रसम्मत माना गया है. अर्घ्य देते समय सूर्य मंत्रों का जप करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस विधि से की गई सूर्य पूजा से सूर्यदेव प्रसन्न होते हैं और भक्त को यश, उत्तम स्वास्थ्य, आत्मबल तथा समाज में मान-सम्मान प्रदान करते हैं। राजनीति में रुचि रखने वालों को इस दिन अवश्य सूर्यदेव की पूजा करनी चाहिए। 
■ अन्न और भोजन का दान : इस दिन अन्नदान का विशेष महत्व है। खिचड़ी का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके साथ ही तिल और गुड़ का दान करने से धन, यश और मान-सम्मान में वृद्धि होती है। इस दिन किसी भूखे व्यक्ति को भोजन कराना मां अन्नपूर्णा की कृपा प्राप्त करने का उत्तम माध्यम माना गया है। वस्त्र दान : मकर संक्रांति के अवसर पर वस्त्र दान का भी विशेष महत्व है। गरीबों, वृद्धों और जरूरतमंदों को नए वस्त्र, सर्दी में कंबल या स्वेटर का दान करना पुण्यकारी माना जाता है। ऐसा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-शांति का मार्ग प्रशस्त होता हैसूर्य गायत्री मंत्र (ॐ आदित्याय विद्महे दिवाकराय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात्)