4 दिसंबर 2025 के त्यौहार

 ■ अन्नपूर्णा जयंती मां अन्नपूर्णा को समर्पित सबसे पवित्र दिनों में से एक है। अन्नपूर्णा मां पोषण, भरपूरता और संतुष्टि देने वाली दिव्य देवी हैं। हिंदू मान्यता के अनुसार, अन्नपूर्णा देवी भोजन, समृद्धि और संतुष्टि की देवी हैं और उनकी जयंती पर उनकी पूजा करने से अनंत अनाज, शांति और मुश्किलों के दूर होने का आशीर्वाद मिलता है। खाने से पहले का  मंत्र है: अन्नपूर्णे सदा पूर्णे शंकरप्राणवल्लभे। ज्ञानवैराग्यसिद्ध्यर्थं भिक्षां देहि च पार्वति॥
■ त्रिपुर भैरवी, दस महाविद्याओं में छठी हैं और इन्हें विनाश तथा सृजन दोनों की देवी कहा जाता है। इनकी पूजा से भय, शत्रु बाधा और जीवन के समस्त बंधनों से मुक्ति मिलती है। उनके हाथ भक्तों को आशीर्वाद देने और उन्हें सभी बुराइयों से बचाने के  लिए उठे हुए हैं। वह लाल वस्त्र धारण करती हैं और उनके एक हाथ में ज्ञान की पुस्तक है। शुभ फल प्राप्त करने के लिए भक्त को देवी त्रिपुर भैरवी की पूजा करते समय लाल रंग की वस्तुओं का प्रयोग करना चाहिए। मंत्र- " ॐ ह्रीं भैरवी कलौं ह्रीं स्वाहा "
■ सनातन धर्म में दत्तात्रेय जयंती का विशेष महत्व है। हिंदू धर्म ग्रंथों में इन्हें ब्रह्मा, विष्णु और शिव का संयुक्त अवतार बताया गया है। मान्यता है कि भगवान दत्तात्रेय की पूजा से त्रिदेवों की आराधना के बराबर का फल प्राप्त किया जा सकता है। 
मंत्र- ॐ दिगंबराय विद्महे योगीश्रारय् धीमहि तन्नो दत्त: प्रचोदयात।
■ मार्गशीर्ष पूर्णिमा भी 4 दिसंबर को हैं। इस दिन प्रदोष काल में लक्ष्मीजी की पूजा की जाती है, सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल प्रारंभ होगा, इसलिए लक्ष्मी पूजा शाम 17.24  के बाद करें। लक्ष्मी पूजा से धन-वैभव की वृद्धि और आर्थिक समस्याओं के समाधान की प्राप्ति होती है। मंत्र- ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभ्यो नमः (कनकधारा स्तोत्रम पाठ भी कर सकते हैं।)