देव उठनी एकादशी तिथि का आरंभ- 1 नवंबर सुबह 09.13 से
और तिथि का समापन 2 नवंबर सुबह 07.32 को होगा
भद्रा काल- 1 नवंबर रात 20.29 से 2 नवंबर सुबह 07.33 तकदेवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागृत होते हैं और चातुर्मास का समापन इसी दिन होता है। इसी दिन से शुभ और मांगलिक कामों की शुरुआत होतीे हैं। देवउठनी एकादशी के दिन तूलसी विवाह का आयोजन होता है। तुलसी के वृक्ष और शालिग्राम की यह शादी सामान्य विवाह की तरह पूरे धूमधाम से की जाती है। चूंकि तुलसी को विष्णु प्रिया भी कहते हैं इसलिए देवता जब जागते हैं, तो सबसे पहली प्रार्थना हरिवल्लभा तुलसीजी की ही सुनते हैं। तुलसी विवाह का सीधा अर्थ है, तुलसीजी के माध्यम से भगवान श्री हरि का आहवान करना।
■ हरिवासर समापन 2 नवंबर दोपहर 12.55 को होगा
■ शास्त्रानुसार 1 नवंबर दशमी व्याप्त एकादशी व्रत पूजा ग्रहस्थों के लिए और
2 नवंबर द्वादशी व्याप्त एकादशी व्रत वैष्णव संप्रदाय के लिए बताई गयी हैं।
■ 1 नवंबर एकादशी पूजन मुहूर्त- सुबह 05.15 से 06.33 तक और
शाम का पूजन मुहूर्त 17.36 से 18.56 तक रहेंगा।
एकादशी व्रत पारणा- 2 नवंबर को दोपहर 13.15 से 15.20 तक होगा।
■ 2 नवंबर एकादशी पूजन मुहूर्त- सुबह 05.16 से 06.34 और शाम 17.35 से 18.53 तक और व्रत पारण 3 नवंबर को सुबह 06.34 से 08.46 तक होगा।
देवउठनी एकादशी के दिन तुलसीजी के पास सुबह-शाम घी का दीपक जलाने और तूलसीजी की पांच बार परिक्रमा से घर में सुख शान्ति आती हैं। एकादशी पर माता तुलसीजी के सिध्द मंत्र- महाप्रसाद जननी सर्व सौभाग्यवर्धिनी आधि व्याधि हरा नित्यं तुलसी त्वं नमोस्तुते का जाप और श्री विष्णु चालीसा, एकादशी व्रत कथा, श्री हरि स्तुति श्रीविष्णु मंत्रों का जाप। विशेष लाभकारी हैं।