■ धनतेरस पूजा /यमदीप पूजन /कुबेर पूजा मुहूर्त ■
18 अक्टूबर सांय- 18.03 से 20.35 तक ।
नर्क चतुर्दशी अभ्यंग स्नान 20 अक्टूबर सुबह 05.13 से 06.25
■ अमावस्या आरंभ- 20 अक्टूबर को 15.46 से 21 अक्टूबर 17.56 तक ■
श्री पूजन,श्री लक्ष्मी,गणपति पूजा के लिए शास्त्रानुसार प्रदोष व्यापिनी अमावस्या
को विशेष महत्वपूर्ण बताया है यानि अमावस्या प्रदोष काल के साथ हो।
जिस शहर में सूर्यास्त सांय 05.30 के बाद हो रहा हैं वहां 20 अक्टूबर को दिवाली होगी ,आप अपने शहर के समय अनुसार श्रीलक्ष्मी पूजा का निर्णय ले सकते हैं।
■ श्रीलक्ष्मी/गणपति पूजन मुहूर्त 20 अक्टूबर सोमवार ■
प्रदोष व्यापिनी अमावस्या पूजा मुहूर्त सांय 17.46 से 20.18 तक
गोधूलि वेला मुहूर्त- 19.08 से 20.18 तक / वृषभ लग्न मुहूर्त- 19.08 से 21.03
निशीता काल मुहूर्त- रात्री 23.41 से 00.31 तक ।
सिंह लग्न मुहूर्त-रात्री 01.50 से 04.00 तक 21 अक्टूबर (मंत्र जाप हेतू शुभ)
■दिपावली लक्ष्मी पूजन 21 अक्टूबर- सौजन्य- श्रीधरी पंचांग,किशनगढ ■
जहां सूर्यास्त शाम 05.30 से पहले हो रहा हैं वहां दिवाली 21 अक्टूबर को होगी।
प्रदोष व्यापिनी अमावस्या मुहूर्त- शाम - 17.41 से 17.56 तक (15 मिनट)
गोधूलि वेला मुहूर्त- शाम 18.00 से 20.33 तक।
वृषभ लग्न मुहूर्त- 19.25 से 21.22 तक / सिंह लग्न- रात्री 01.53 से 04.08 तक
■ पूजा समय परिहार- सुबह 08.45 से 11.02 (22 अक्टूबर) ■
■रोकड नव कार्य शुभारंभ- सुबह 06.45 से 09.33 तक (22 अक्टूबर) ■
■ पाड़वा/ गोवर्धन पूजा- सुबह 06.26 से 08.42 तक (22 अक्टूबर) ■
■ भाई दूज तिलक मुहूर्त-13.13 से 15.28 तक (23 अक्टूबर) ■