सनातन धर्म में पितृ पक्ष का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता
है। इस दौरान लोग अपने मृत पूर्वजों को याद करते हैं
और उनका श्राद्ध करते हैं। मान्यता है कि इस दौरान हमारे
पितृ धरती पर आते हैं और ऐसे में जो भी उनका तर्पण या
श्राद्ध करता है उसे वे अपना आशीर्वाद प्रदान करते हैं। कहते हैं
पितृ पक्ष में श्राद्ध कर्म करने से पितृ दोष से भी मुक्ति मिल जाती है।
1. पूर्णिमा श्राद्ध- सितम्बर 7, 2025, रविवार 13.34 से 16.05 तक
2. प्रतिपदा श्राद्ध- सितम्बर 8, 2025, सोमवार आश्विन मास
3. द्वितीया श्राद्ध- सितम्बर 9, 2025, मंगलवार आश्विन, द्वितीया
4. तृतीया श्राद्ध- सितम्बर 10, 2025, बुधवार आश्विन, कृष्ण तृतीया
5. चतुर्थी श्राद्ध- सितम्बर 10, 2025, बुधवार आश्विन, कृष्ण चतुर्थी
6. पञ्चमी श्राद्ध- सितम्बर 11, 2025, बृहस्पतिवार , कृष्ण पञ्चमी
7. षष्ठी श्राद्ध- सितम्बर 12, 2025, शुक्रवार आश्विन, कृष्ण षष्ठी
8. सप्तमी श्राद्ध- सितम्बर 13, 2025, शनिवार आश्विन, कृष्ण सप्तमी
9. अष्टमी श्राद्ध- सितम्बर 14, 2025, रविवार आश्विन, कृष्ण अष्टमी
10. नवमी श्राद्ध- सितम्बर 15, 2025, सोमवार आश्विन, कृष्ण नवमी
11. दशमी श्राद्ध- सितम्बर 16, 2025, मंगलवार आश्विन, कृष्ण दशमी
12. एकादशी श्राद्ध- सितम्बर 17, 2025, बुधवार आश्विन, इंदिरा एकादशी
13. द्वादशी श्राद्ध- सितम्बर 18, 2025, बृहस्पतिवार आश्विन, गुरुपुष्यमृत
14. त्रयोदशी श्राद्ध- सितम्बर 19, 2025, शुक्रवार आश्विन, कृष्ण त्रयोदशी
15. चतुर्दशी श्राद्ध- सितम्बर 20, 2025, शनिवार आश्विन, कृष्ण चतुर्दशी
16. अमावस्या- सितम्बर 21, 2025, रविवार आश्विन, सर्वपितृकार्य श्राद्ध