पंचांग के मुताबिक
15 अगस्त को रात 23. 48 मिनट पर भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि आरंभ होगी।
वहीं 16 अगस्त को रात 21.35 मिनट पर अष्टमी तिथि समाप्त होगी।
रोहिणी नक्षत्र आरंभ- 17 अगस्त प्रात: 04.38 पर और समाप्त 18 अगस्त प्रात: 03.17 तक
इस बार अष्टमी + रोहिणी नक्षत्र का एकसाथ योग नहीं बन रहा हैं। क्योंकि भगवान कृष्ण का जन्म रात्री में हुआ था इसलिए विद्वानों द्वारा जन्माष्टमी 15 अगस्त को रात्री में मनाना ज्यादा उचित बताया जा रहा हैं।
जन्माष्टमी पर शुभ मुहूर्त 15 अगस्त की मध्य रात्रि (निशिता काल) 12:05 से लेकर 12:45 (16 अगस्त) तक रहेगा। जन्माष्टमी का व्रत 15 अगस्त को रहेंगा। व्रत पारण 12.47 के बाद होगा।
जहाँ जन्माष्टमी 16 अगस्त को मनाएंगे वहां व्रत 16 अगस्त को रखा जायेगा।
भगवान कृष्ण की पूजा करने और अभिषेक का मुहूर्त 16 अगस्त को (ब्रह्ममुहूर्त 04.24 से 05.07 तक हैं। ) पूजा करने का मुहूर्त 04.46 am से 05.51am तक रहेगा।